मंगलवार, 1 अगस्त 2017

प्रार्थना सभा कार्यक्रम - 3


लब पे आती है दुआ बनके

लब पे आती है दुआ बनके तमन्ना मेरी ,
जिन्दगी सम्मह की सूरत हो खुदाया मेरी ।
दूर दुनिया का मेरे दम से अंधेरा हो जाये ,
हर जगह मेरे चमकने से उजाला हो जाये ।
हो मेरे दम से यू हीं मेरे वतन की जीनत ,
जिस तरह फूलों से होती है चमन की जीनत ।
जिन्दगी हो मेरे परवाने की सूरत या रब ,
इल्म की सम्मह से हो मुझको मोहब्बत या रब ।
हो मेरा काम गरीबों से हिमायत करना ,
दर दमन्दों से जईफों से मोहब्बत करना ।
मेरे अल्लाह बुराई से बचाना मुझको ,
नेक जो राह हो उसी राह पे चलाना मुझको ।
लब पे आती है दुआ बनके तमन्ना मेरी ,
जिन्दगी सम्मह की सूरत हो खुदाया मेरी ।


वन्दना


माँ सरस्वती वरदान दो , मुझको नवल उत्थान दो।
यह विश्व ही परिवार हो , सबके लिए सम प्यार हो।
आदर्श लक्ष्य महान हो ।
माँ सरस्वती.................................................।
मन , बुद्धि , हृदय पवित्र हो , मेरा महान चरित्र हो।
विद्या , विनय वरदान दो ।
माँ सरस्वती.................................................।
माँ शारदे , हँससिनी , वागीश , वीणा - वादिनी।
मुझको अगम स्वर ज्ञान दो।
माँ सरस्वती.................................................।
माँ सरस्वती वरदान दो , मुझको नवल उत्थान दो।
उत्थान दो , उत्थान दो ..............................।

तू ही राम है , तू रहीम है।

तू करीम कृष्ण , खुदा हुआ।।
तू ही वाहे गुरु , तू यीशू मसीह।
हर नाम में तू समा रहा।।
तेरी जात पाक कुरान में।
तेरा दरश वेद - पुराण में।।
गुरु ग्रंथ जी के बखान में।
तू प्रकाश अपना दिखा रहा।।
तू ही राम है , तू रहीम है।
तू करीम कृष्ण , खुदा हुआ।।
अरदास है , कहीं कीरतन।
कहीं रामधुन , कहीं आवाह्न।।
विधि - वेद का यह सब रचन।
तेरा भक्त तुझको बुला रहा।।
विधि वेश जाति के भेद से।
हमें मुक्त करदो परमपिता।।
तुझे देख पायें सभी में हम।
तुझे पा सके हम सभी जगह।।
तू ही राम है , तू रहीम है।
तू करीम कृष्ण , खुदा हुआ।।
तू ही राम है.....................।

हमको मन की शक्ति देना

हमको मन की शक्ति देना , मन विजय करें।
दूसरों की जय से पहले , खुद को जय करें।।
भेदभाव अपने दिल से साफ कर सकें।
दूसरों से भूल हो तो माफ कर सकें।।
झूठ से बचे रहें , सच का दम भरें।
दूसरों की जय से पहले , खुद को जय करें।।
हमको................................................।
मुश्किलें पढ़ें तो हम पे इतना करम कर ।
साथ दे तो धरम का , चलें तो धरम पर।।
खुद पे होंसला रहे , बदी से हम डरें।
दूसरों की जय से पहले , खुद को जय करें।।
हमको................................................।

हर देश में तू , हर वेश में तू
हर देश में तू , हर वेश में तू
तेरे नाम अनेक , तू एक ही है।
तेरी रंगभूमि यह विश्वधरा
सब खेल में , मेल में , तू ही तू है।
सागर से उठा बादल बनके
बादल से बहा जलधार बना।
फिर नहर बना , नदियाँ गहरी
तेरे भिन्न प्रकार , तू एक ही है।
चींटी से अणु परमाणु बना
सब जीव जगत का रूप लिया।
कहीं पर्वत वृक्ष विशाल बना
सौंदर्य तेरा , तू एक ही है।
यह दिव्य दिखाया है जिसने
वह है गुरुदेव की पूर्ण दया।
' तुकड्या' कहे और न कोई दिखा
बस मैं और तू , सब एक ही है।

सितारों में तू है विचारों में तू है।

सितारों में तू है विचारों में तू है।
सितारों में तू है विचारों में तू है।
धरती के कण कण में करतार तू है ,
सितारों में .............................।
लाखों की बिगड़ी बनाने वाले ,
अरे दीनबंधु हजारों में तू है।
सितारों में .............................।
बड़ी शान वाला दातार दिल का ,
हकीकत हे मालिक दोनों जहाँ का।
सितारों में .............................।
बाजू बढ़ाकर उठा लेने वाले ,
अरे दीनबंधु हजारों में तू है।
सितारों में .............................।
सदा बेसहारों का तू ही सहारा ,
भला मेल खाया हमारा तुम्हारा।
सितारों में .............................।
पत्थर को पारस बना देने वाले ,
अरे दिनबंधु हजारों में तू है।
सितारों में .............................।
सितारों में तू है विचारों में तू है।
सितारों में तू है विचारों में तू है।
धरती के...........................।

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