रविवार, 23 जुलाई 2017

प्रार्थना सभा कार्यक्रम - 2

वह शक्ति हमें दो दयानिधे

वह शक्ति हमें दो दयानिधे, कर्त्तव्य मार्ग पर डट जाएँ।
पर सेवा , पर उपकार में हम, निज जीवन सफल बना जाएँ।।
हम दिन दुखी निबलों विकलों, के सेवक बन संताप हरें।
जो हैं अटके भूले भटके, उनको तारें ,खुद तर जाएँ।।
छल द्वेष दम्भ पाखंड झूठ, अन्याय से निशि दिन दूर रहें।
जीवन हो शुद्ध सरल अपना, शुचि प्रेम सुधा रस बरसाएँ।।
निज आन मान मर्यादा का, प्रभु ध्यान रहे अभिमान रहे।
जिस मातृ - भूमि पर जन्म लिया , बलिदान उसी पर हो जाएँ।।
वह शक्ति ..............................................।

ईश्वर तुझे ही कहते

ईश्वर तुझे ही कहते , भगवान है नाम तेरा,
हर शाख-शाख तेरी,प्रभु ओउम नाम तेरा।
आना तू मेरे घर में ,घर-घर बना के खेल।
नन्हा सा घर है मेरा, उसमें मुकाम तेरा।।
ईश्वर तुझे............
फूलों का तू है माली , प्राणों का तू है स्वामी।
सारी जमीं है तेरी, यह आसमान तेरा।।
ईश्वर .........
वेदों में तू लिखा है, पुराणों में तू छिपा है।
गीता पुकारती है, प्रभु ओउम नाम तेरा।।
ईश्वर तुझे......

हे स्वर की देवी माँ

हे स्वर की देवी माँ , वाणी में मधुरता दो।
हम गीत सुनाते हैं , संगीत की शिक्षा दो।
अज्ञान ग्रसित होकर , क्या गीत सुनायें हम।
टूटे हुए शब्दों से , क्या स्वर को सुनाएं हम।
दो ज्ञान राग माँ तुम , वाणी में मधुरता दो।
सरगम का ज्ञान नहीं , शब्दों में सार नहीं।
तुम्हें आज सुनाने को , मेरी मैया कुछ भी नहीं।
संगीत समंदर से , स्वर ताल हमें दे दो।
भक्ति ना शक्ति है , शब्दों का ज्ञान नहीं।
तुम्हें आज सुनाने को , मेरी मैया कुछ भी नहीं।
गीतों के खजाने से एक गीत हमें दे दो।
हे स्वर की देवी माँ , वाणी में मधुरता दो।

दया कर दान भक्ति का
दया कर दान भक्ति का , हमें परमात्मा देना।
दया करना हमारी आत्मा में शुद्धता देना।
हमारे ध्यान में आओ , प्रभु आँखों मे बस जाओ।
अंधेरे दिल मे आकर के , परम् ज्योति जगा देना।
दया कर .............................................।
हमारा कर्म हो सेवा , हमारा धर्म हो सेवा ।
सदा ईमान हो सेवा  , व सेवक चर बना देना ।
दया कर .............................................।
बहा दो प्रेम की गंगा , दिलों में प्रेम का सागर ।
हमें आपस में मिलजुल कर ,  प्रभु रहना सिख देना।
वतन के वास्ते जीना , वतन के वास्ते मरना ।
वतन पर जां फिदा करना , प्रभु हमको सिखा देना ।
दया कर .............................................।



शारदे माँ वन्दना स्वीकार कर

शारदे माँ वन्दना स्वीकार कर , शरण में आए हैं नैया पार कर।
शारदे माँ ...............................................।
जय वीणा वादिनी कमलासिनी , दूर कर अज्ञान तम पद्मासिनी ।
ज्ञान की ज्योति जला उद्धार कर।
शारदे माँ ...............................................।
सुमन श्रद्धा से करें माँ अर्चना , नित्य चरणों में करें माँ वन्दना।
अज्ञानी नादान हैं माँ प्यार कर।
शारदे माँ ...............................................।
शांति की सरिता बहे संसार में , शुद्ध जीवन हो लगे उपकार में।
नीति दे माँ विश्व का कल्याण कर।
शारदे माँ ...............................................।

हँस वाहिनी वर दे

हँस वाहिनी वर दे विद्यादान दे , मधुर कंठ दे माँ भक्ति का दान दे।
जन जन में माँ प्रेम का संचार कर।
शारदे माँ ...............................................।
हँस वाहिनी ऐसा वर दो , अवगुण हरकर सद्गुण भर दो।
पढ़ लिखकर माँ हम , विद्वान बन जायेंगे , भारत से अनपढ़ता को हम दूर भगायेंगे।
दुखियों की सेवा दिल मे भर दो , अवगुण हरकर सद्गुण भर दो।
हँस वाहिनी ............................................।
झूठ और पाप के हम पास नहीं जाएंगे , अन्यायी के आगे हम शीश नहीं झुकायेंगे।
दुश्मन को सज्जन दिल से कर दो , अवगुण हरकर सद्गुण भर दो ।
हँस वाहिनी ............................................।
भाषा का विवाद मैया देश से मिटायेंगे , हम सब एक हैं ये भावना जगायेंगे ।
वाणी में मैया ओजस भर दो , अवगुण हरकर सद्गुण भर दो ।
हँस वाहिनी ............................................।